
तेलंगाना अस्पताल शवगृह मामला: मृत घोषित कर शवगृह भेजा गया मरीज निकला जिंदा, अस्पताल में मचा हड़कंप!
हैदराबाद: तेलंगाना के महबूबाबाद जिले में एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने पूरे स्वास्थ्य विभाग को हिला दिया है। तेलंगाना अस्पताल शवगृह मामला तब शुरू हुआ जब एक 45 वर्षीय व्यक्ति को सरकारी अस्पताल में मृत घोषित कर शवगृह भेज दिया गया, लेकिन कुछ घंटे बाद पता चला कि वह व्यक्ति अब भी जीवित है।
यह घटना गुरुवार रात की है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक व्यक्ति को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित किया और शवगृह भेज दिया गया। लेकिन जब स्टाफ ने शव को तैयार करना शुरू किया, तभी सबके होश उड़ गए — मरीज की सांसें चल रही थीं।
कैसे हुआ यह हादसा?
महबूबाबाद जिले के रहने वाले राजू कुमार को उनके परिवार वाले गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। ड्यूटी डॉक्टर ने कुछ मिनट जांच करने के बाद कहा कि मरीज की सांस बंद हो चुकी है। अस्पताल के कर्मचारियों ने शव को रैपर में लपेटा और शवगृह भेज दिया।
करीब तीन घंटे बाद शवगृह में काम कर रहे कर्मियों ने देखा कि व्यक्ति की उंगलियाँ हिल रही हैं और उसकी छाती हल्की उठ-गिर रही है। तुरंत अलार्म बजा दिया गया। मौके पर पहुंचे सर्जन ने पुष्टि की कि व्यक्ति जीवित है। इसके बाद उसे तुरंत ICU में शिफ्ट किया गया, जहाँ फिलहाल उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग ने दी सफाई, 3 कर्मचारी निलंबित
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने इस घटना को “अत्यंत गंभीर लापरवाही” बताया और जांच के आदेश दिए। महबूबाबाद जिला सर्जन ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तीन लोगों की लापरवाही सामने आई है — ड्यूटी डॉक्टर, नर्स और एक वार्ड बॉय को तत्काल निलंबित किया गया है।
जिला प्रशासन ने भी बयान जारी कर कहा कि “किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने से पहले सभी पैरामीटर्स जैसे पल्स, ऑक्सीजन स्तर और ECG कम से कम दो बार जांचे जाने चाहिए।”
परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने जल्दबाजी में बिना उचित जांच किए मृत्यु घोषित कर दी। “अगर शवगृह के कर्मचारियों ने ध्यान न दिया होता, तो शायद हमारे पिता की मौत पक्की हो जाती,” मृतक के बेटे ने मीडिया से कहा।
तेलंगाना अस्पताल शवगृह मामला बना राष्ट्रीय चर्चा का विषय
यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। ट्विटर (X) और फेसबुक पर लोग स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही पर गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा, “देश में अस्पतालों का सिस्टम इतना कमजोर है कि जिंदा लोगों को भी मृत घोषित किया जा रहा है।”
इस घटना के बाद विपक्षी पार्टियों ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि तेलंगाना की मेडिकल व्यवस्था “कोमा में” चली गई है। कांग्रेस और भाजपा नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री से इस्तीफे की मांग की है।
चिकित्सकीय दृष्टि से क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
हैदराबाद के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. सतीश रेड्डी का कहना है कि “ऐसे मामलों में अक्सर शरीर का तापमान गिर जाता है, हृदय गति बहुत धीमी हो जाती है और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी सिग्नल नहीं पकड़ पाते। ऐसे में मरीज को गलती से मृत मान लिया जाता है।”
उनके अनुसार, हर अस्पताल में ‘Reconfirmation Protocol’ होना चाहिए — यानी किसी भी व्यक्ति को मृत घोषित करने से पहले दो अलग-अलग डॉक्टरों की जांच और हस्ताक्षर अनिवार्य हों। “यह एक छोटी सी चूक नहीं, जीवन-मृत्यु का मामला है,” उन्होंने कहा।
पिछले साल भी हुई थी ऐसी घटना
2024 में राजस्थान के जयपुर और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में भी इसी तरह की घटनाएं हुई थीं, जहाँ मरीजों को मृत मानकर शवगृह भेज दिया गया था लेकिन बाद में वे जीवित पाए गए। यह दर्शाता है कि भारत के कई राज्यों में चिकित्सा प्रशिक्षण और निगरानी की भारी कमी है।
सरकार ने जारी किए नए निर्देश
तेलंगाना स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के सभी अस्पतालों को सर्कुलर जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि मृत्यु की घोषणा से पहले ऑक्सीजन स्तर, ECG और रक्तचाप की कम से कम तीन बार पुष्टि की जाए। साथ ही शवगृह भेजने से पहले “दूसरे डॉक्टर” से लिखित अनुमति अनिवार्य कर दी गई है।
इस घटना के बाद अस्पतालों में डर का माहौल है। कई जगह मेडिकल स्टाफ अब मरीज को मृत घोषित करने से पहले अतिरिक्त परीक्षण कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की गलती न हो।
जनता में अविश्वास और चिंता
इस हादसे ने लोगों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर डर और अविश्वास बढ़ा दिया है। महबूबाबाद में स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और जिम्मेदार डॉक्टरों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। “अगर सरकार सख्त कदम नहीं उठाएगी तो कोई गरीब अपनी जान बचाने अस्पताल आने की हिम्मत नहीं करेगा,” एक स्थानीय नागरिक ने कहा।