अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान वार्ता इस्तांबुल तनाव युद्ध चेतावनी

अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान वार्ता विफल: इस्तांबुल में बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी ‘खुले युद्ध’ की चेतावनी | TTP पर भड़का इस्लामाबाद

अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान वार्ता इस्तांबुल में तुर्की की मध्यस्थता में आयोजित की गई, लेकिन तीन दिन की बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो सका। पाकिस्तान ने अफ़ग़ान तालिबान को सख्त चेतावनी दी है कि अगर TTP के हमले नहीं रुके, तो “खुला युद्ध” होगा।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने कहा, “हमारी सीमाओं पर हर दिन हमारे जवान मारे जा रहे हैं। अगर अफ़ग़ानिस्तान अपनी जमीन से चल रहे आतंक को नहीं रोकता, तो पाकिस्तान अपनी सुरक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।”

अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान वार्ता क्यों टूटी?

वार्ता के दौरान पाकिस्तान ने TTP के ठिकानों की जानकारी अफ़ग़ान प्रतिनिधिमंडल को दी, लेकिन तालिबान ने कार्रवाई से इनकार कर दिया। अफ़ग़ान विदेश मंत्रालय ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान किसी भी विदेशी देश को अपने क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने देगा।

सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने “Anti-Terror Cooperation Plan” पेश किया था जिसमें सीमा निगरानी और साझा गश्त का प्रस्ताव था। अफ़ग़ान पक्ष ने इसे “संप्रभुता का उल्लंघन” बताया, जिसके बाद वार्ता टूट गई।

सीमा पर बढ़ा तनाव

अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान वार्ता विफल होने के तुरंत बाद दोनों देशों की सीमा पर तनाव बढ़ गया है। तोरख़म और चमन बॉर्डर इलाकों में फायरिंग की घटनाएँ हुईं। पाकिस्तान ने 5 सैन्य पोस्ट्स पर अलर्ट जारी किया और सीमाई इलाकों में सेना बढ़ा दी।

पाकिस्तान सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि वह अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले ट्रांजिट ट्रेड को सीमित कर सकती है। यह निर्णय काबुल की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका दे सकता है।

TTP और तालिबान पर पाकिस्तान की सख्ती

पाकिस्तान का कहना है कि TTP को अफ़ग़ानिस्तान में पनाह मिल रही है। पिछले तीन महीनों में 70 से अधिक हमले हुए हैं, जिनमें पाकिस्तानी जवान और नागरिक मारे गए।
अफ़ग़ानिस्तान ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पाकिस्तान “अपनी सुरक्षा विफलताओं का दोष दूसरों पर मढ़ रहा है।”

तुर्की और संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रिया

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन ने कहा कि “अफ़ग़ानिस्तान पाकिस्तान वार्ता रुक सकती है, लेकिन समाप्त नहीं हुई है।” संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका ने भी दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत जारी रखने की अपील की है।

भविष्य की स्थिति और संभावित खतरा

विश्लेषकों का कहना है कि अगर दोनों देशों के बीच संवाद बहाल नहीं हुआ, तो यह विवाद दक्षिण एशिया में नई प्रॉक्सी वॉर को जन्म दे सकता है। भारत और ईरान भी इस स्थिति से प्रभावित हो सकते हैं।
वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, पाकिस्तान अब अपनी पुरानी ‘स्ट्रैटेजिक डेप्थ’ नीति पर पुनर्विचार कर रहा है, जिसने उसे तालिबान पर भरोसा करने के लिए प्रेरित किया था।

काबुल ने चेतावनी दी है कि “अगर पाकिस्तान ने अफ़ग़ान सीमा पर कोई सैन्य कार्रवाई की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” इस बयान ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

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स्रोत: News18 Hindi | Reuters

लेखक: Suraj Pandey

 

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