rahul gandhi open letter — 272 senior citizens support Election Commission

Tag: राष्ट्रीय राजनीति   |
Author: Suraj Pandey   |

272 वरिष्ठ नागरिकों का खुला पत्र — राहुल गांधी पर “vote chori” के आरोपों को लेकर कड़ा नोटिस

19 नवंबर 2025: देश के 272 प्रतिष्ठित वरिष्ठ नागरिकों ने एक खुला पत्र जारी कर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा चुनाव आयोग (Election Commission) पर लगाए गए “vote chori” दावों पर आपत्ति जताई। यह पत्र लगभग 16 पूर्व न्यायाधीशों, करीब 123 सेवानिवृत्त सिविल सेवकों (जिसमें लगभग 14 पूर्व राजदूत शामिल हैं) और 133 सेवानिवृत्त सशस्त्र बल अधिकारियों के हस्ताक्षर सहित प्रकाशित हुआ।

पत्र का मूल तर्क यह है कि चुनाव आयोग भारत के लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है और किसी भी सार्वजनिक नेता द्वारा बार-बार, बिना ठोस सबूत के लगाए जाने वाले आरोप इस संस्था की विश्वसनीयता को कमजोर करते हैं। इसीलिए वरिष्ठ नागरिकों ने सार्वजनिक मंच पर जिम्मेदारी और प्रमाण-आधारित बहस की अपील की है।

rahul gandhi open letter — पूरा टेक्स्ट और प्रमुख उद्धरण

खुला पत्र स्पष्ट भाषा में कहता है कि लोकतांत्रिक बहस ज़रूरी है, पर संवैधानिक संस्थाओं पर सतत आरोप लगाना राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है। पत्र में आग्रह किया गया कि यदि किसी नेता के पास किसी तरह के प्रमाण हैं तो उन्हें सार्वजनिक कर के जांच करायी जाए; बिना साक्ष्य के आरोपों को दोहराना केवल अविश्वास और भ्रम फैलाता है।

पत्र के कुछ प्रमुख अंशों में यह कहा गया है कि शब्दों का चयन जिम्मेदारी के साथ होना चाहिए और कटु भाषा से लोकतांत्रिक विमर्श की गरिमा को नुकसान पहुंचता है। वरिष्ठ नागरिकों ने संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा की रक्षा की अपील की है।

राहुल गांधी ने हाल ही में सार्वजनिक सभाओं में EVM/मतगणना और चुनावी पारदर्शिता पर अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं और कुछ बयानों में उन्होंने आयोग की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। इन्हीं बयानों के जवाब में यह rahul gandhi open letter जारी किया गया मान जा रहा है।

पत्र सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाएँ तेज़ हुईं — कुछ ने इसे संस्थागत सुरक्षा की आवाज़ बताया, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित करार दिया। कांग्रेस ने कहा कि यह वोटिंग व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठाने का एक तरीका है, जबकि पत्र के हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि आरोप प्रमाण सहित रखने चाहिए।

इसके अलावा, प्रमुख समाचार-स्रोतों ने इस पत्र और सूचीबद्ध हस्ताक्षरों की पुष्टि की है। आप मूल पत्र और पूर्ण सूची यहां देख सकते हैं: India Today — Full text (Open Letter).

इस विवाद का सार यह है कि यह किसी एक व्यक्ति या पार्टी का मामला नहीं रह गया; यह अब लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सार्वजनिक विश्वास और जिम्मेदार भाषा के प्रयोग का राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में इस पर और सार्वजनिक बहस, प्रेस-कांफ़्रेंस और सम्भवतः न्यायिक पहल भी देखने को मिल सकती हैं।

निष्कर्ष: फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह खुला पत्र असली और दस्तावेजीकृत है — परन्तु पाठक को सुझाया जाता है कि वे मूल पत्र की भाषा स्वयं पढ़कर संदर्भ और उद्धरणों की पुष्टि कर लें।

External source: India Today — Open Letter (Full Text)
Internal reference: VartaWave

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