
भोपाल दिवाली हादसा
भोपाल दीवाली हादसा 2025: इस बार दीवाली की रात भोपाल में खुशियों के बीच डर का माहौल बन गया। कैल्शियम कार्बाइड और PVC पाइप से बनी देसी गन के धमाके में 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए…
लेखक: Suraj Pandey | स्थान: भोपाल
भोपाल दीवाली हादसा से जुड़ी पूरी कहानी
भोपाल में दीवाली की रौनक इस बार डर में बदल गई। जिस रात लोग पटाखों और रोशनी से खुशियाँ मना रहे थे, उसी रात कुछ इलाकों में ऐसा धमाका हुआ कि हर कोई दहशत में आ गया। लोग सोच भी नहीं सकते थे कि एक साधारण पाइप और कुछ केमिकल मिलकर इतना बड़ा हादसा कर सकते हैं।
घटना रविवार रात की बताई जा रही है, जब शहर के कई हिस्सों में लोगों ने दीवाली के बाद “देसी धमाका” करने की कोशिश की। कुछ युवाओं ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो देखकर PVC पाइप में कैल्शियम कार्बाइड और पानी डालकर एक “देसी पाइप गन” बनाई। वीडियो में ये हथियार चलाने का दावा किया गया था, लेकिन भोपाल में यह प्रयोग जानलेवा साबित हुआ।
रात करीब आठ बजे जैसे ही युवाओं ने पाइप में आग लगाई, जोरदार धमाका हुआ। आसपास के लोगों को लगा कि शायद गैस सिलेंडर फट गया है। धुएं से पूरा इलाका भर गया और लोग भागने लगे। कुछ सेकंड बाद चीख-पुकार शुरू हो गई। देखने वालों के अनुसार, धमाके की आवाज़ इतनी तेज़ थी कि खिड़कियों के शीशे तक हिल गए।
अस्पतालों से मिली जानकारी के अनुसार, करीब 300 लोग घायल हुए हैं। इनमें से 40 से ज्यादा लोगों की आंखों को गंभीर चोटें आई हैं। कई मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है और डॉक्टरों का कहना है कि कुछ की आंखों की रौशनी स्थायी रूप से चली भी गई है।
कैल्शियम कार्बाइड एक ऐसा केमिकल है जो पानी के संपर्क में आते ही एसिटिलीन गैस बनाता है। यह गैस बहुत ज्वलनशील होती है और जब बंद पाइप में भरती है तो विस्फोट कर जाती है। भोपाल में युवाओं ने इसी गैस का प्रयोग “देसी फायर गन” बनाने में किया, जो असल में एक रासायनिक बम बन गया।
भोपाल पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की और अब तक कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को रोकने की मांग भी की है, ताकि कोई और व्यक्ति इस खतरनाक प्रयोग को दोहराए नहीं।
भोपाल के हमीदिया और जेपी अस्पतालों में घायलों का इलाज चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि कैल्शियम कार्बाइड से निकलने वाला धुआँ आंखों और त्वचा के लिए बेहद हानिकारक है। कई मरीजों के चेहरे पर जलन और घाव हैं।
मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी जिलों में अलर्ट जारी कर दिया है। स्कूलों और मोहल्लों में जागरूकता अभियान चलाने की योजना बन रही है ताकि लोग समझें कि इंटरनेट पर दिखने वाले “जुगाड़ वाले प्रयोग” कितने घातक हो सकते हैं।
यह हादसा सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं है। ग्वालियर, जबलपुर और विदिशा में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आई हैं, जहां बच्चों और युवाओं ने सोशल मीडिया से सीखकर ऐसे पाइप गन बनाए और फिर हादसे का शिकार हुए।
एक स्थानीय निवासी ने बताया — “हम तो सोच रहे थे बच्चे पटाखे चला रहे हैं, पर जब धमाका हुआ तो ऐसा लगा जैसे किसी ने बम फोड़ा हो।” कई लोगों ने इसे अपनी जिंदगी का सबसे डरावना अनुभव बताया।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर सोशल मीडिया पर ऐसे खतरनाक वीडियो कौन अपलोड करता है? क्या ये सब किसी “वायरल ट्रेंड” की वजह से हो रहा है? पुलिस ने कहा है कि जिन चैनलों ने ऐसे वीडियो अपलोड किए हैं, उनके खिलाफ साइबर एक्शन लिया जाएगा।
भोपाल हादसे ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि थोड़ी-सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। त्योहार की खुशी को बचाने के लिए जरूरी है कि हम समझदारी से जश्न मनाएं — ना कि ऐसे प्रयोगों से अपनी और दूसरों की जान जोखिम में डालें।https://hindi.news18.com/
लेखक: Suraj Pandey
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