CIA अधिकारी जॉन किरियाको का खुलासा — अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर किया नियंत्रण

अमेरिका-पाकिस्तान परमाणु नियंत्रण खुलासा: CIA अफसर का सनसनीखेज दावा

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025 | रिपोर्ट: Suraj Pandey — दुनिया के सबसे ताकतवर देशों में मानी जाने वाली अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के पूर्व अधिकारी जॉन किरियाको (John Kiriakou) ने ऐसा खुलासा किया है जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हिला कर रख दिया है। उन्होंने दावा किया है कि अमेरिका ने अरबों डॉलर की मदद देकर पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ को “खरीद” लिया था, ताकि पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण हासिल किया जा सके।

अमेरिका ने ‘खरीद’ लिया था पाकिस्तान?

जॉन किरियाको ने अमेरिकी न्यूज एजेंसी NNI को दिए इंटरव्यू में बताया कि वॉशिंगटन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर की सहायता दी थी ताकि पाकिस्तान की रक्षा नीतियां अमेरिकी हितों के अनुरूप चल सकें। इस डील के बाद अमेरिका ने न केवल पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों पर बल्कि उसके परमाणु प्रोग्राम पर भी नियंत्रण जमा लिया था।

किरियाको ने कहा, “वॉशिंगटन ने पाकिस्तान के साथ ऐसा गुप्त समझौता किया था जिससे अमेरिकी एजेंसियों को इस्लामाबाद के परमाणु ठिकानों तक पहुंच मिल गई थी। अमेरिका जानना चाहता था कि पाकिस्तान के पास कितने परमाणु हथियार हैं और उनका इस्तेमाल कैसे हो सकता है।”

उन्होंने आगे बताया कि परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में यह डील सबसे गुप्त रखी गई थी। पाकिस्तान की जनता और यहां तक कि कई मंत्री भी इस समझौते से अनजान थे। केवल कुछ वरिष्ठ अफसरों और अमेरिकी अधिकारियों को ही इस “स्ट्रेटेजिक कोऑर्डिनेशन” की जानकारी थी।

इस खुलासे ने वैश्विक राजनीति में भूचाल ला दिया है। कई देशों के रक्षा विश्लेषक यह मान रहे हैं कि अगर यह दावा सच है तो यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी खुफिया साजिश हो सकती है।

भारत-पाक रिश्तों पर गहरा असर

भारत के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से परमाणु संतुलन का मुद्दा चलता आया है। भारत के सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका ने वास्तव में पाकिस्तान के परमाणु हथियारों पर नियंत्रण कर लिया था, तो भारत के खिलाफ किसी भी सैन्य कदम की अनुमति पाकिस्तान के पास नहीं रही होगी।

रक्षा विशेषज्ञ अजय शुक्ला का कहना है, “यह खुलासा इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान अब स्वतंत्र परमाणु शक्ति नहीं रहा था। अमेरिका के इशारों पर चलना उसकी मजबूरी बन चुकी थी।”

उन्होंने आगे कहा कि भारत को अब इस खुलासे का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर करना चाहिए ताकि यह दिखाया जा सके कि पाकिस्तान का परमाणु नियंत्रण सुरक्षित नहीं था और उसकी विदेश नीति पर अमेरिका का प्रभाव रहा है।

भारत सरकार ने इस मुद्दे पर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली इस पूरे मामले की जानकारी जुटा रही है और आने वाले दिनों में संसद में इस पर चर्चा हो सकती है।

सोशल मीडिया और दुनिया भर में मचा हड़कंप

जैसे ही यह खुलासा सामने आया, सोशल मीडिया पर #CIA, #Pakistan, #AtomBomb और #JohnKiriakou जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। ट्विटर (X) और फेसबुक पर लाखों लोगों ने इस खबर को शेयर करते हुए सवाल उठाए — “क्या पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा अमेरिका को बेच दी?”

अमेरिकी अख़बारों ने भी इस खबर को प्रमुखता से छापा है। Washington Times ने इसे “America’s Secret Nuclear Deal” बताया, जबकि New York Post ने लिखा — “The Day America Owned Pakistan’s Nukes.”

पाकिस्तान के अंदर इस बयान ने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। वहां के विपक्षी नेताओं ने कहा है कि अगर यह सच है तो यह पाकिस्तान के सम्मान और स्वतंत्रता पर गहरा आघात है। सोशल मीडिया पर लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं कि क्या पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने वाकई में विदेशी हस्तक्षेप को स्वीकार किया था?

वहीं अमेरिका की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बयान को “पुराने और अपुष्ट दावों” पर आधारित बताया, लेकिन किसी भी स्तर पर इसे खारिज नहीं किया गया।

किरियाको ने आगे कहा कि उस दौर में पाकिस्तान के कई वरिष्ठ अधिकारी अमेरिकी एजेंसियों से सीधे संपर्क में थे और कई बार ऐसी बैठकें हुईं जिनमें परमाणु हथियारों की लोकेशन और तकनीकी जानकारी साझा की गई। उन्होंने कहा कि यह सब एक “डील के बदले भरोसा” के रूप में हुआ था।

कई विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि अमेरिका ने इस सौदे के बाद पाकिस्तान को F-16 लड़ाकू विमान और रक्षा सहायता के नाम पर भारी फंडिंग दी थी, जो बाद में तालिबान विरोधी अभियानों के लिए इस्तेमाल की गई।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह सच है कि 2001 के बाद पाकिस्तान को अमेरिका से अरबों डॉलर की सैन्य सहायता मिली थी। इस समय ये खबरें फिर चर्चा में हैं क्योंकि कई पुराने CIA दस्तावेज़ अब डिक्लासीफाइड हो चुके हैं।

इन दस्तावेज़ों में यह संकेत जरूर मिलता है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के परमाणु प्रोग्राम पर “टेक्निकल मोनिटरिंग” रखी थी। इसका मतलब यह था कि कोई भी परीक्षण या अपग्रेड अमेरिकी निगरानी में ही हो सकता था।

यह मामला अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि नैतिक सवाल भी खड़ा करता है — क्या कोई देश दूसरे देश के परमाणु अधिकारों को खरीद सकता है? क्या वैश्विक राजनीति में “मदद” के नाम पर परमाणु नियंत्रण संभव है?

जॉन किरियाको का बयान इन सवालों को और गहरा कर गया है। भारत सहित पूरी दुनिया की निगाहें अब अमेरिका और पाकिस्तान की प्रतिक्रियाओं पर हैं।


लेखक: Suraj Pandey | Source: India TV / NNI Interview | Focus Keyword: अमेरिका-पाकिस्तान परमाणु नियंत्रण खुलासा

Tags: CIA अफसर बयान, अमेरिका पाकिस्तान न्यूज़, जॉन किरियाको खुलासा, पाकिस्तान परमाणु हथियार, परवेज मुशर्रफ डील

 

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