नए CJI की नियुक्ति तय! जस्टिस सूर्यकांत होंगे भारत के अगले मुख्य न्यायाधीश – जानें कब संभालेंगे कार्यभार
CJI सूर्यकांत नियुक्ति मामला अब सुर्खियों में है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में जस्टिस सूर्यकांत का नाम केंद्र सरकार को भेज दिया है। सूत्रों के अनुसार, केंद्र ने 23 अक्टूबर को ही नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू कर दी थी। संविधान के तहत यह प्रक्रिया “मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर” (Memorandum of Procedure) के अनुसार होती है।
इस प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को अगला मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया जाता है। CJI गवई ने भी इसी परंपरा को निभाते हुए जस्टिस सूर्यकांत का नाम सुझाया है। उम्मीद है कि केंद्र जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेगा।
CJI सूर्यकांत नियुक्ति मामला: कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?
जस्टिस सूर्यकांत वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश हैं। उनका जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा में हुआ था। उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की डिग्री ली और 1984 में वकालत की शुरुआत की। 2004 में उन्हें पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का एडवोकेट जनरल बनाया गया था।
2018 में वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और 2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त किए गए। पिछले कुछ वर्षों में उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसलों में हिस्सा लिया है जिनमें पर्यावरण, सामाजिक न्याय और सरकारी जवाबदेही से जुड़े मामले प्रमुख रहे हैं।
कब संभालेंगे कार्यभार?
जानकारी के अनुसार, मौजूदा CJI बी.आर. गवई का कार्यकाल 24 नवंबर 2025 को समाप्त हो रहा है। इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ लेंगे। उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक रहने की संभावना है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा जल्द ही औपचारिक रूप से नियुक्ति अधिसूचना जारी की जाएगी। India Today रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और न्याय मंत्रालय के बीच सभी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई हैं।
न्यायपालिका में उनकी पहचान
जस्टिस सूर्यकांत को एक संवेदनशील और सख्त न्यायाधीश माना जाता है। उन्होंने अपने करियर के दौरान कई बार सरकारों को जिम्मेदारी की याद दिलाई है। “हर नागरिक को न्याय का अधिकार है, चाहे वह गरीब हो या अमीर” — यह उनका बार-बार दोहराया जाने वाला सिद्धांत रहा है।
उनके फैसलों में संविधान की भावना, नागरिक स्वतंत्रता और समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा झलकती है। इसी कारण उन्हें सुप्रीम कोर्ट के “सबसे निष्पक्ष और मानवतावादी जजों” में गिना जाता है।
कानूनी जगत की प्रतिक्रिया
कानूनी जगत में CJI सूर्यकांत नियुक्ति मामला को लेकर उत्साह है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं और जजों ने इसे न्यायपालिका के लिए सकारात्मक कदम बताया है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष ने कहा, “सूर्यकांत जी के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट न्याय की दिशा में और मज़बूत होगा।”
वहीं राजनीतिक हलकों में भी इस नियुक्ति को लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ विश्लेषकों का कहना है कि सूर्यकांत के कार्यकाल में जजों की जवाबदेही और पारदर्शिता को और बल मिलेगा।
भारत के इतिहास में CJI की नियुक्ति प्रक्रिया
भारत में CJI नियुक्ति का निर्णय पूरी तरह से वरिष्ठता पर आधारित होता है। यह परंपरा 1950 से चली आ रही है। “मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर” (MoP) के तहत मौजूदा CJI अपने उत्तराधिकारी का नाम केंद्र सरकार को सुझाते हैं, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अधिसूचित किया जाता है।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य न्यायपालिका की स्वतंत्रता और पारदर्शिता बनाए रखना है। यही कारण है कि इस बार भी कोई विवाद नहीं हुआ और सभी पक्षों की सहमति से जस्टिस सूर्यकांत का नाम सामने आया।
CJI सूर्यकांत नियुक्ति मामला भारत की न्यायिक प्रणाली के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है क्योंकि यह बदलाव देश की उच्चतम अदालत की दिशा तय करेगा।
© 2025 VartaWave | लेखक: Suraj Pandey