जाति समानता पर टकराव गोविंद सिंह बनाम बागेश्वर धाम

“जाति समानता पर टकराव” — गोविंद सिंह बनाम बागेश्वर धाम: मध्य प्रदेश में बढ़ा सियासी तूफान

भोपाल: मध्य प्रदेश की सियासत में धर्म और जाति का मुद्दा फिर से उफान पर है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने बागेश्वर धाम के प्रमुख पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को खुलेआम चुनौती दी है। उन्होंने कहा — “अगर उनके पास सच में दैवी शक्तियां हैं, तो वे समाज में जाति समानता स्थापित करके दिखाएँ।”

गोविंद सिंह ने भोपाल में एक जनसभा के दौरान कहा कि “देश में आज सबसे बड़ा धर्म है — समानता का धर्म। अगर धीरेंद्र शास्त्री सच में ईश्वर के दूत हैं, तो वे ब्राह्मण, दलित, पिछड़ा, आदिवासी सबको एक समान मानने का संदेश दें। मैं उन्हें चुनौती देता हूँ कि वे किसी मंच से कहें — कोई ऊंच-नीच नहीं है, सब एक हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर उनके पास चमत्कारिक शक्तियां हैं तो वे भेदभाव खत्म करें, गरीब को सम्मान दिलाएं और समाज में बराबरी का भाव पैदा करें। लोगों के भूत उतारने से पहले, समाज में छुआछूत और जातिवाद का भूत उतारना जरूरी है।”

गोविंद सिंह के इस बयान के बाद भाजपा खेमे में नाराजगी फैल गई है। भाजपा प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “कांग्रेस हर बार धार्मिक आस्थाओं पर हमला करती है। गोविंद सिंह जैसे नेता सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं।”

वहीं, कांग्रेस नेताओं ने अपने नेता के बयान का बचाव करते हुए कहा कि डॉ. गोविंद सिंह ने सिर्फ समानता का धर्म उठाया है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, “हम धर्म के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन हम पाखंड के खिलाफ हैं। अगर कोई संत समाज में एकता की बात करता है, तो उसे जातिवाद के खिलाफ बोलना चाहिए।”

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेगा। कांग्रेस जहां जातीय समानता का मुद्दा उठा रही है, वहीं भाजपा इसे हिंदू अस्मिता से जोड़ने की कोशिश कर रही है। आने वाले समय में यह मामला प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है।

सोशल मीडिया पर भी इस विवाद के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। एक तरफ कांग्रेस समर्थक गोविंद सिंह के बयान को समाज सुधार की दिशा में कदम बता रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा समर्थक इसे धार्मिक भावनाओं पर चोट मान रहे हैं।

बागेश्वर धाम से जुड़े सूत्रों ने कहा कि “पंडित जी समाज को जोड़ने का काम करते हैं, तोड़ने का नहीं। वे हमेशा एकता की बात करते हैं और किसी को भी नीचा नहीं दिखाते।”

कांग्रेस का मानना है कि समाज में समानता और न्याय की बात करना राजनीति नहीं, बल्कि संविधान का पालन है। पार्टी प्रवक्ता ने कहा, “हम सिर्फ यह कहना चाहते हैं कि अगर कोई खुद को ‘ईश्वर का दूत’ कहता है, तो उसका पहला कर्तव्य समानता और न्याय फैलाना होना चाहिए।”

यह पूरा “जाति समानता पर टकराव” अब राजनीति और धर्म दोनों के लिए चुनौती बन गया है। एक ओर कांग्रेस इसे सामाजिक सुधार का सवाल बना रही है, तो दूसरी ओर भाजपा इसे आस्था पर हमले के रूप में पेश कर रही है।

लेखक: Suraj Pandey | VartaWave News

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