
Xi Jinping APEC Summit 2025: चीन ने अमेरिका-जापान को दी नई आर्थिक चुनौती, Rare Earth पर बढ़ा तनाव
VartaWave News | Author: Suraj Pandey | Date: 2 नवंबर 2025
Xi Jinping APEC Summit 2025: दक्षिण कोरिया में आयोजित Asia-Pacific Economic Cooperation (APEC) शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping ने अमेरिका और जापान को सीधे संदेश दिया। Xi ने कहा कि “आर्थिक अलगाव नहीं, बल्कि सहयोग ही एशिया-प्रशांत क्षेत्र की प्रगति का रास्ता है।” इस बयान ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि अमेरिका और जापान Rare Earth Minerals के क्षेत्र में नई साझेदारी बना रहे हैं।
Xi Jinping बोले – “Rare Earth कोई राजनीतिक हथियार नहीं”
Xi Jinping ने कहा कि कुछ देश व्यापार और तकनीक को राजनीतिक हथियार बना रहे हैं, जिससे वैश्विक विकास अस्थिर हो रहा है। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका और जापान पर निशाना साधते हुए कहा कि “Rare Earth और तकनीकी संसाधन सभी देशों की साझा संपत्ति हैं, न कि किसी का नियंत्रण साधन।”
APEC Summit 2025 में जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi और Xi Jinping की मुलाकात भी चर्चा में रही। दोनों नेताओं ने “रचनात्मक और स्थिर संबंधों” पर सहमति जताई। हालांकि ताइवान और दक्षिण चीन सागर विवाद जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
दूसरी ओर अमेरिका ने जापान के साथ मिलकर Rare Earth और Critical Minerals की नई सप्लाई चेन बनाने की घोषणा की है ताकि चीन पर निर्भरता कम की जा सके। इससे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तेज़ हो गई है।
Rare Earth की जंग और भविष्य की आर्थिक दिशा
Rare Earth खनिज ऐसे तत्व हैं जिनका उपयोग मोबाइल फोन, रक्षा तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों में होता है। वर्तमान में विश्व की 70% Rare Earth आपूर्ति चीन से होती है। अब अमेरिका और जापान इस एकाधिकार को तोड़ना चाहते हैं। इसीलिए Xi Jinping का यह बयान कि “सहयोग ही स्थिरता की कुंजी है” अमेरिका की नीति के लिए एक कूटनीतिक जवाब माना जा रहा है।
इस शिखर सम्मेलन में दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया जैसे देशों ने Xi Jinping के “मल्टी-लैटरलिज़्म” (बहुपक्षीय सहयोग) विचार का समर्थन किया। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधियों ने कहा कि “चीन को नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था का पालन करना होगा।”
विश्लेषकों का मानना है कि Xi Jinping APEC Summit 2025 ने आने वाले वर्षों के लिए एक नई आर्थिक ध्रुवीकरण की स्थिति बना दी है। Rare Earth संसाधनों को लेकर यह टकराव आगे “21वीं सदी की सबसे बड़ी व्यापारिक जंग” बन सकता है।
स्रोत: Reuters | ABP Live | Al Jazeera | The Australian | India Today
लेखक: Suraj Pandey | ©