Operation Sindoor Pakistan संविधान संशोधन

Operation Sindoor के बाद Pakistan की सियासत में हलचल: Asim Munir को मिल रही संविधानिक ताकत!

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इस्लामाबाद: भारत के Operation Sindoor के बाद पाकिस्तान की राजनीति और सेना दोनों में हलचल मच गई है। Shehbaz Sharif सरकार ने अब संविधान में बदलाव की तैयारी कर ली है ताकि Army Chief Asim Munir को और अधिक संवैधानिक शक्तियाँ दी जा सकें। यह कदम देश के सैन्य ढांचे को नया रूप देने और सेना को राजनीति में और प्रभावशाली बनाने की दिशा में माना जा रहा है।

> “Operation Sindoor Pakistan ने देश की राजनीतिक और सैन्य रणनीति को पूरी तरह बदल दिया।”

“विश्लेषक मानते हैं कि Operation Sindoor Pakistan के बाद सेना की भूमिका पहले से अधिक निर्णायक हो गई है।”

“यह घटनाक्रम Operation Sindoor Pakistan के प्रभाव को दर्शाता है।”

ABP Live की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने 27वां संविधान संशोधन बिल तैयार किया है जिसके तहत एक नया पद “Chief of Defence Forces (CDF)” बनाया जा रहा है। इस पद को तीनों सेनाओं के ऊपर “एकीकृत सैन्य नियंत्रण” के रूप में देखा जा रहा है।
मौजूदा सेना प्रमुख Asim Munir को इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार बताया जा रहा है।
Operation Sindoor Pakistan के बाद क्या बदल रहा है?

यह बदलाव ऐसे समय में आ रहा है जब पाकिस्तान के अंदर आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और आतंकवाद की बढ़ती घटनाओं ने सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार का दावा है कि यह संशोधन “राष्ट्रीय सुरक्षा और नीति-निर्माण में सामंजस्य” लाने के लिए है, लेकिन विपक्षी पार्टियाँ इसे “लोकतांत्रिक ढांचे पर सैन्य कब्जे की शुरुआत” कह रही हैं।

Operation Sindoor Pakistan ने देश की राजनीतिक और सैन्य रणनीति को पूरी तरह बदल दिया।”

“विश्लेषक मानते हैं कि Operation Sindoor Pakistan के बाद सेना की भूमिका पहले से अधिक निर्णायक हो गई है।”

“यह घटनाक्रम Operation Sindoor Pakistan के प्रभाव को दर्शाता है।”

कई विश्लेषकों के अनुसार, Operation Sindoor के बाद पाकिस्तान की सेना अपने भीतर गहराई से आत्ममंथन कर रही है। भारतीय सेना की आक्रामक नीति और सीमा पार जवाबी कार्रवाइयों ने पाकिस्तान को अपनी रक्षा नीति में बड़ा बदलाव करने पर मजबूर कर दिया है।
इस बदलाव का एक सीधा असर सत्ता संरचना पर पड़ रहा है, जहाँ अब सेना एक बार फिर सबसे निर्णायक शक्ति बनती दिख रही है।

Economic Times की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस संशोधन से पाकिस्तान में सेना प्रमुख को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के बराबर दर्जा मिल सकता है।
वहीं Telegraph India ने बताया कि यह बिल “Deep State” की ताकत को बढ़ाएगा, जिससे सैन्य और खुफिया तंत्र की भूमिका और गहरी हो जाएगी।

विपक्षी दलों — पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) — ने इस प्रस्ताव पर कड़ा विरोध जताया है। PTI नेताओं ने कहा कि संविधान को सेना के हितों के लिए बदलना लोकतंत्र की आत्मा के साथ विश्वासघात है।
एक विपक्षी सांसद ने कहा — “यह संविधान संशोधन नहीं, एक नया सत्ता अध्याय है जिसमें संसद सिर्फ नाम की रह जाएगी।”

वहीं प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कहा कि देश की सुरक्षा और एकता सर्वोपरि है। उन्होंने दावा किया कि “Chief of Defence Forces” पद बनने से तीनों सेनाओं में समन्वय बेहतर होगा और आतंकवाद से लड़ने की रणनीति और मजबूत बनेगी।

भारत के दृष्टिकोण से यह घटनाक्रम अहम है। विशेषज्ञ मानते हैं कि “Operation Sindoor” ने पाकिस्तान की नीतिगत कमजोरी उजागर की, जिसके बाद उसने अपने सैन्य ढांचे में सुधार का रास्ता चुना है।
हालांकि, यह सुधार पाकिस्तान के लोकतांत्रिक भविष्य पर किस दिशा में असर डालेगा, यह आने वाला समय बताएगा।

रिपोर्ट: Suraj Pandey | स्रोत: ABP Live

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