PM नरेंद्र मोदी ASEAN समिट 2025 में वर्चुअल रूप से शामिल होंगेPM मोदी ASEAN समिट ट्रम्प मुलाकात

PM मोदी नहीं जाएंगे ASEAN समिट, ट्रम्प से मुलाकात की उम्मीदें खत्म — जानिए क्यों लिया बड़ा फैसला

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में होने जा रही 47वीं ASEAN समिट में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेंगे। उन्होंने यह फैसला लिया है कि वे इस सम्मेलन में वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लेंगे। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब इस शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रम्प और मोदी की संभावित मुलाकात की चर्चा जोर पर थी।

दीपावली और व्यस्त कार्यक्रम बना कारण

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने पुष्टि की कि प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से सूचित किया है कि भारत में दीपावली के कारण व्यस्त कार्यक्रम होने से वे इस बार यात्रा नहीं करेंगे। मोदी का यह फैसला भारत की प्राथमिकताओं और घरेलू व्यस्तताओं को दर्शाता है।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री का कार्यालय पहले से ही कई घरेलू योजनाओं की तैयारियों में व्यस्त है। दीपावली से जुड़ी घटनाओं के अलावा, कई बड़े आर्थिक कार्यक्रम और निवेश मीटिंग्स की भी तैयारी चल रही है।

ट्रम्प- मोदी मुलाकात की संभावना खत्म

इस बार ASEAN समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भी शामिल होने की संभावना थी। ऐसे में माना जा रहा था कि दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात होगी, जो भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया मोड़ साबित हो सकती थी। लेकिन मोदी के सम्मेलन में प्रत्यक्ष रूप से भाग न लेने से यह उम्मीदें फिलहाल समाप्त हो गई हैं।

भारत और अमेरिका के बीच इस समय कई मुद्दे चर्चा में हैं — जिनमें ऊर्जा व्यापार, रक्षा सहयोग और डिजिटल सुरक्षा शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दोनों देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से अहम होती।

हालांकि, विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि मोदी की अनुपस्थिति के बावजूद भारत की प्रतिनिधि टीम उच्चस्तरीय वार्ता में शामिल होगी। इससे संकेत मिलता है कि भारत अपने एशियाई और अमेरिकी संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम जारी रखेगा।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और रणनीतिक संकेत

मोदी के इस निर्णय पर विपक्षी दलों ने तंज कसा है। कांग्रेस ने इसे “राजनयिक अवसर गंवाना” बताया, जबकि भाजपा नेताओं ने कहा कि यह एक “विचारित रणनीतिक निर्णय” है, जिससे भारत अपने राष्ट्रीय एजेंडे पर अधिक ध्यान केंद्रित कर सकेगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मोदी का यह फैसला एक नया ट्रेंड दिखाता है — जहां भारत अब सिर्फ उपस्थिति के बजाय प्रभावी भागीदारी पर ध्यान दे रहा है। वर्चुअल भागीदारी से भारत अपने रुख को स्पष्ट करेगा, लेकिन संसाधन और समय की बचत भी करेगा।

भारत की विदेश नीति अब बहु-आयामी हो चुकी है। दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ संबंध बढ़ाने के साथ-साथ, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा सहयोग और व्यापारिक साझेदारी को भी समान महत्व दे रहा है।

 

PM मोदी ASEAN समिट ट्रम्प मुलाकात

भारत की विदेश नीति पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का ASEAN समिट में न जाना भारत की विदेश नीति को कमजोर नहीं करता, बल्कि यह “स्मार्ट डिप्लोमेसी” का उदाहरण है। आज भारत की कूटनीति पारंपरिक यात्रा से आगे बढ़कर डिजिटल मंचों और वर्चुअल बैठकों पर केंद्रित हो रही है।

ASEAN देशों के साथ भारत की साझेदारी “Act East Policy” का हिस्सा है। पिछले वर्षों में भारत ने ASEAN देशों के साथ रक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी पर कई महत्वपूर्ण समझौते किए हैं।

भले ही मोदी की अनुपस्थिति चर्चा में हो, लेकिन भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री और उच्च अधिकारियों द्वारा सुनिश्चित करेगा कि देश के हित सुरक्षित रहें।

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मोदी की व्यस्तता, घरेलू त्योहारों और रणनीतिक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाने का संकेत है।

निष्कर्ष

प्रधानमंत्री मोदी का ASEAN समिट में वर्चुअल रूप से शामिल होना भारत की बदलती कूटनीतिक नीति का परिचायक है। यह दर्शाता है कि भारत अब वैश्विक मंचों पर “उपस्थिति” के बजाय “प्रभाव” पर ज़ोर दे रहा है।

PM मोदी ASEAN समिट ट्रम्प मुलाकात

ट्रम्प-मोदी मुलाकात न होने से तत्काल कोई बड़ा नुकसान नहीं होगा, लेकिन कूटनीतिक दृष्टि से यह निश्चित रूप से चर्चा का विषय रहेगा। आने वाले महीनों में भारत-अमेरिका और भारत-ASEAN संबंधों की दिशा इसी रणनीति पर निर्भर करेगी।

लेखक: Suraj Pandey

स्रोत: Reuters, Times of India, Economic Times, News18 Hindi, IndiaTV

 

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