साध्वी प्राची बरेली बयान विवाद – ‘दंगाइयों की नसबंदी हो’

साध्वी प्राची का बरेली में विवादित बयान: “दंगाइयों की नसबंदी हो” — पूरे देश में मचा बवाल

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बरेली (उत्तर प्रदेश): हिंदू नेता साध्वी प्राची एक बार फिर सुर्खियों में हैं। रविवार को बरेली में हुए एक धार्मिक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “दंगाइयों की नसबंदी होनी चाहिए।” यह बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया, और कुछ ही घंटों में यह मुद्दा पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। समर्थक इसे “सख्त कानून की मांग” बता रहे हैं, जबकि विरोधियों ने इसे “असंवैधानिक और भड़काऊ” करार दिया है।

इस कार्यक्रम का आयोजन बरेली जिले के एक मंदिर परिसर में किया गया था, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। साध्वी प्राची ने अपने भाषण में कहा, “जो लोग देश में दंगे करवाते हैं, पत्थरबाजी करते हैं, और पुलिस पर हमला करते हैं, उनकी नसबंदी होनी चाहिए ताकि अगली पीढ़ी में हिंसा का संस्कार न जाए।”

उनके इस बयान के बाद सभा स्थल पर तालियों की गूंज सुनाई दी, लेकिन जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर पहुंचा, माहौल पूरी तरह बदल गया। ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर यह वीडियो हजारों बार शेयर किया गया। हैशटैग #SadhviPrachi और #BareillyStatement ट्रेंड करने लगे।

सोशल मीडिया की प्रतिक्रिया: कुछ यूज़र्स ने साध्वी प्राची के बयान को “कठोर लेकिन ज़रूरी” बताया, वहीं कई ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला कहा। एक यूज़र ने लिखा, “ऐसे बयान समाज को बांटते हैं, सुधार नहीं करते।” जबकि एक अन्य ने कहा, “जो देश में आग लगाते हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।”

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बयान के बाद कई राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं ने प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता ने ट्वीट किया, “यह बयान पूरी तरह असंवैधानिक है। कोई भी व्यक्ति कानून को हाथ में नहीं ले सकता।” जबकि बीजेपी समर्थकों में से कुछ ने कहा कि “साध्वी ने वही कहा जो जनता सोचती है।”

पुलिस और प्रशासन का रुख: बरेली के एसएसपी ने कहा कि “हमें बयान का वीडियो मिला है। इसकी जांच की जा रही है। यदि बयान में किसी समुदाय या व्यक्ति की भावना आहत हुई है, तो कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।”

यह पहली बार नहीं है जब साध्वी प्राची ने इस तरह का विवादित बयान दिया हो। इससे पहले भी उन्होंने लव जिहाद, फिल्मी कलाकारों, और राजनीतिक मुद्दों पर कई बार तीखे शब्दों का प्रयोग किया है। उनके कई भाषणों पर पहले भी IPC की धारा 153A (धर्म, जाति, या समुदाय के आधार पर वैमनस्य फैलाने) और 505(2) (भड़काऊ भाषण) के तहत केस दर्ज किए गए हैं।

कानूनी विश्लेषण: संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि “नसबंदी जैसी सजा” किसी भी भारतीय दंड संहिता के तहत वैध नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष श्रीवास्तव के अनुसार, “भारत का संविधान किसी व्यक्ति को शारीरिक दंड देने की अनुमति नहीं देता। ऐसे बयान न केवल मानवाधिकार का उल्लंघन करते हैं बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार) के विपरीत हैं।”

उन्होंने आगे कहा कि, “ऐसे बयान सार्वजनिक अशांति को भड़का सकते हैं। प्रशासन को इन्हें गंभीरता से लेना चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी नेता इस तरह की असंवेदनशील भाषा का प्रयोग न करे।”

विरोधी दलों का बयान: समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने इसे बीजेपी की “ध्रुवीकरण की राजनीति” बताया। एसपी प्रवक्ता ने कहा कि “ऐसे बयान जानबूझकर दिए जाते हैं ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाया जा सके।” वहीं कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “धर्म की आड़ में हिंसा को बढ़ावा देना सबसे बड़ा अपराध है।”

समर्थकों का बचाव: साध्वी प्राची के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने केवल देशहित की बात की है। उनके मुताबिक, “दंगाइयों पर सख्ती होनी ही चाहिए क्योंकि ये लोग राष्ट्र विरोधी ताकतों के हाथों में खेलते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट्स और वीडियो क्लिप्स: India TV और Dainik Jagran सहित कई हिंदी न्यूज पोर्टलों ने इस खबर को प्रमुखता से चलाया है। स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, भाषण के दौरान साध्वी प्राची के समर्थकों ने “जय श्री राम” के नारे भी लगाए थे।

वहीं, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि साध्वी प्राची का यह बयान गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया और उनके शब्दों को संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर डाला गया। फिलहाल, उन्होंने खुद इस पर कोई सफाई नहीं दी है।

स्थानीय लोगों की राय: बरेली शहर के कुछ निवासियों ने कहा कि “हर बार चुनाव से पहले ऐसे बयान सामने आते हैं ताकि माहौल गरमाया जा सके।” वहीं कुछ लोगों ने इसे “सच्चाई का आईना” बताया। एक व्यापारी ने कहा, “अगर कानून सख्त होगा तो हिंसा कम होगी।”

निष्कर्ष: साध्वी प्राची का यह बयान एक बार फिर यह सवाल उठाता है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सामाजिक ज़िम्मेदारी के बीच रेखा कहाँ खींची जाए। क्या समाज में सुधार ऐसे बयानों से होगा या इससे नफ़रत और बढ़ेगी? इसका जवाब आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई और जनता की प्रतिक्रिया तय करेगी।

फिलहाल, यह घटना न केवल बरेली बल्कि पूरे देश में राजनीतिक और सामाजिक विमर्श का केंद्र बन चुकी है। इस बयान ने एक बार फिर साबित किया है कि शब्दों की ताकत कितनी बड़ी होती है — खासकर जब वे किसी सार्वजनिक मंच से बोले

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