
Donald Trump Hamas Warning: 48 घंटे की चेतावनी, बोले—बंधकों के शव तुरंत लौटाओ वरना अंजाम भुगतो
ट्रंप का दो टूक अल्टीमेटम: “48 घंटे में शव लौटाओ”
वॉशिंगटन/गाज़ा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए हमास को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि अगर हमास ने 48 घंटे के भीतर बंधकों के शव नहीं लौटाए, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह बयान तब आया जब गाज़ा में युद्धविराम (Ceasefire) लागू है और शव-वापसी को लेकर लगातार टकराव जारी है।
ट्रंप ने अपने बयान में कहा, “बंधकों की वापसी सिर्फ एक मानवीय दायित्व नहीं है, यह युद्ध के बुनियादी सिद्धांतों में से एक है। जो संगठन इसे नहीं समझता, उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाब देना होगा।” इस बयान के बाद क्षेत्र में कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है।
जानकारों के मुताबिक, यह Donald Trump Hamas Warning सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश है — ट्रंप यह दिखाना चाहते हैं कि अमेरिका अब गाज़ा संकट में ‘दर्शक’ नहीं बल्कि ‘निर्णायक शक्ति’ के रूप में काम करेगा।
गाज़ा में जमी मिस्र की टीम, शव-वापसी के सुराग तलाशने में जुटी
गाज़ा पट्टी में चल रहे युद्धविराम के दौरान मिस्र की एक तकनीकी टीम पहुंच चुकी है। इस टीम में फोरेंसिक विशेषज्ञ, सुरक्षा सलाहकार और मानवीय एजेंसियों के अधिकारी शामिल हैं। उनका लक्ष्य बंधकों के शवों की पहचान, लोकेशन और ट्रांसफर को समन्वित करना है। बताया जा रहा है कि अब तक कुछ शव रेड क्रॉस के हवाले किए जा चुके हैं, लेकिन 20 से ज्यादा शवों की पुष्टि अभी बाकी है।
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि उनकी कोशिश है कि इस मानवीय पहल में दोनों पक्ष सहयोग करें। हालांकि हमास की तरफ से इस पर अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। इज़रायल ने भी कहा है कि वे शवों की स्थिति की पुष्टि होने तक किसी नए समझौते पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे।
एक रिपोर्ट के अनुसार, हमास के पास अब भी कुछ विदेशी नागरिकों के शव हैं, जिनमें दो अमेरिकी और एक फ्रांसीसी नागरिक का नाम शामिल बताया जा रहा है। इसी वजह से ट्रंप प्रशासन ने सीधा हस्तक्षेप करते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम जारी किया है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और संभावित असर
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि “बंधकों के शवों की वापसी किसी राजनीतिक सौदे का हिस्सा नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे मानवीय प्राथमिकता दी जानी चाहिए।” वहीं, ब्रिटेन और फ्रांस ने ट्रंप के बयान का समर्थन किया है और कहा है कि हमास को अंतरराष्ट्रीय दबाव का सामना करना पड़ेगा।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हमास इस चेतावनी को नजरअंदाज करता है, तो अमेरिका “टारगेटेड सैन्य एक्शन” या “आर्थिक प्रतिबंधों” का विकल्प अपना सकता है। यह भी संभावना जताई जा रही है कि अमेरिका मिस्र और कतर के साथ मिलकर एक नया मध्यस्थता प्रस्ताव ला सकता है।
गाज़ा में फिलहाल स्थिति नाजुक बनी हुई है। युद्धविराम के बावजूद sporadic हमले जारी हैं। नागरिक इलाकों में अब भी राहत और पुनर्निर्माण का काम धीमी गति से चल रहा है। वहीं, शव-वापसी को लेकर परिवारों में रोष और बेचैनी बढ़ रही है।
Donald Trump Hamas Warning ने एक तरह से इस संकट को नई दिशा दे दी है। अमेरिका का यह रुख यह दर्शाता है कि वाशिंगटन अब सिर्फ शांति मध्यस्थ नहीं, बल्कि दबाव डालने वाली शक्ति के रूप में भूमिका निभाने को तैयार है।
भारत के लिए इसका क्या मतलब?
भारत के दृष्टिकोण से यह स्थिति दोहरी चुनौती पेश करती है। एक ओर गाज़ा संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और आपूर्ति पर पड़ सकता है, दूसरी ओर वहां काम करने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर संघर्ष दोबारा भड़कता है तो ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ेगी, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
नई दिल्ली ने फिलहाल इस पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने कहा है कि “भारत सभी पक्षों से संयम बरतने और मानवीय सिद्धांतों का पालन करने की अपील करता है।”
मध्य पूर्व के जानकारों का मानना है कि आने वाले दो दिन निर्णायक होंगे। अगर शव-वापसी का मामला सुलझता है तो यह युद्धविराम को स्थायित्व देगा, अन्यथा ट्रंप की चेतावनी एक बड़े भू-राजनीतिक टकराव में बदल सकती है।
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